​– श्रीचैतन्य महाप्रभुकी अद्भुत बाललीला —


Pastimes of Nimai (Sri Chaitanya Mahaprabhu)

 बालक निमाइ घुटनो और हाथोंके बल चलने लगे थे। उनके पिता श्रीजगन्नाथ मिश्र एवं माता श्रीशचीदेवी उनकी बालसुलभ क्रीड़ाओंको निहारकर फुले नहीं समाते। उस दिन शामको भारतके तीर्थोंमें भ्रमण करते हुए एक भक्त विप्र घरपर अतिथि रूपमे पधारे थे। मिश्रदम्पत्तिने श्रद्धापूर्वक लीप-पोतकर चौका लगाकर रसोइकी सामग्री उनके समक्ष प्रस्तुत की। विप्र महोदयनै स्वयं पाक कार्य किया और विधिपूर्वक अपने इष्टदेव श्रीबालगोपालको भोग निवेदन कर उनका ध्यान करने लगे। इसी बीच कुछ शब्द सुनकर चोंक पडे। आँखे खुलने पर देखा बालक निमाई किलकारियों मारता हुआ भोगकी थालमें हाथ डालकर प्रसाद ग्रहण कर रहा है। ब्राह्मण देवता हाय-हाय करने लगे। मिश्र और मिश्रानी यह देखकर बडे दुखी हुए। उनके बार–बार अनुरोध करनेपर विप्रने दूसरी बार रन्धन किया और पुन: भोग लगाया। परन्तु इस बार भी चंचल निमाईने न जाने कहासे उपस्थित होकर भोगको जूठा कर दिया । वीप्रदेव पुन: हाय-हाय करने लग गये। इस बार मिश्र–दम्पतिको बहुत दूख हूआ। रात भी काफी हो चूँकि थी। परन्तु निमाइके बडे भाई विश्वरूपके अत्यधिक आग्रहके कारण विप्रने तीसरी बार रसोई तैयार कर भोग निवेदन किया। इस बार बालक निमाईको पडोसीके घरमें बन्द करके रखा गया। किन्तु आश्चर्यकि बात हुई कि ज्योंही विप्रने भोग अर्पण कर आँखे बन्द की और गोपाल मन्त्र जपना आरम्भ किया, त्योंहीँ बालक निमाई हँसता हुआ भोग थालमें हाथ लगा कर खाते हुये दिखाई पडा। विप्रदेव पुन: हाहाकार कर उठे। इतनेमें निमाई शंख-चक्र-गदा-पद्म धारण किये एवं एक हाथमें मक्खन रख दूसरेसे मक्खन खाते हुये अदभुत सौंदर्य–मण्डित बालगोपाल (कृष्ण) षड्भुज रूपमें दर्शन दिया। सौभाग्यवान विप्रदेव अपने इष्टका दर्शन कर प्रेमसे गदगद हो पडे। श्रीभगवान् विप्रक्रो अपनी इस लीलाको गुप्त रखनेका आदेश देकर अन्तर्धान हो गये। ब्राह्मण-देवता उस रूपका चिन्तन करते हुए प्रेमसे महाप्रसाद पाकर कृतकृत्य हो गये।

हरे कृष्ण हरे कृष्ण,कृष्ण कृष्ण हरे हरे । हरे राम हरे राम,राम राम हरे हरे ।।

Six arm form of Sri Chaitanya
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2 Comments Add yours

  1. mahekjari says:

    Pls follow n share my blog !💫 great day ahead

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