All Names Are Names of Lord Krishna

From the Govinda Bhasya commentary on Vedanta by Acharya Srila Baldeva Vidyabhushana: Some may quote several passages of the scriptures to identify the Supreme Brahman as someone else than Lord Visnu, or to prove that the creation can have a cause different than Him. Here are some examples: [From Adhikarana 8 of 4th pada of…

षड-दर्शन: छ: परंपरागत वैदिक दर्शनों में से केवल बादरायण व्यास कृत वेदान्त ही त्रुटिरहित है।

परम्परागत भारतीय दर्शन में वैशेषिक, न्याय, सांख्य, योग तथा मीमांसा दर्शनों के अनुयायी अपने-अपने भ्रान्तिमूलक विचार रखते हैं, जिसकी ओर साक्षात् वेद इस स्तुति में इंगित कर रहे हैं। वैशेषिकजन कहते हैं कि इस दृश्य ब्रह्माण्ड की उत्पत्ति परमाणुओं की मूलराशि से हुई (जनिम् असत:)।

केन उपनिषद् (२.१): यदि तुम सोचते हो कि तुम ब्रह्म को भलीभाँति जानते हो, तो तुम्हारा ज्ञान बहुत ही कम है।

  श्रीमद्भागवतं १०.८७.३० अपरिमिता ध्रुवास्तनुभृतो यदि सर्वगतास् तर्हि न शास्यतेति नियमो ध्रुव नेतरथा । अजनि च यन्मयं तदविमुच्य नियन्तृ भवेत् सममनुजानतां यदमतं मतदुष्टतया ॥ ३०॥ अनुवाद: यदि ये असंख्य जीव सर्वव्यापी होते और अपरिवर्तनशील शरीरों से युक्त होते, तो हे निर्विकल्प, आप संभवत: उनके परम शासक न हुए होते। लेकिन चूँकि वे आपके स्थानिक अंश हैं…

गौर पूर्णिमा: जब दिव्य भक्ति का सिद्धान्त लुप्त हो गया, तो श्रीकृष्ण चैतन्य भक्ति-विधि को पुन: बताने हेतु प्रकट हुए ।

— जब दिव्य भक्ति का सिद्धान्त लुप्त हो गया, तो श्रीकृष्ण चैतन्य भक्ति-विधि को पुन: बताने हेतु प्रकट हुए । —  श्रीमद्भगवतम् ११.५.३२ कृष्णवर्णं त्विषाकृष्णं साङ्गोपाङ्गास्त्र-पार्षदम् । यज्ञै: सङ्कीर्तनप्रायैर्यजन्ति हि सुमेधस: ॥ ३२॥  शब्दार्थ कृष्ण-वर्णम्—कृष्ण में आये अक्षरों को दुहराना; त्विषा—कान्ति से; अकृष्णम्—काला नहीं (सुनहला); स-अङ्ग—संगियों समेत; उप-अङ्ग–सेवकगण; अस्त्र—हथियार; पार्षदम्—विश्वासपात्र साथी; यज्ञै:—यज्ञ द्वारा; सङ्कीर्तन-प्रायै:—मुख्य रूप…

What does the Vedas say about its own origin?

OVERVIEW: ORIGIN OF THE VEDAS How the Vedas survived till the date or passed from one generation to another till the current age, i.e. Kaliyuga? When the Vedas first written down? ORIGIN OF THE VEDAS There are many, many different dates for the existence of the Vedas by the materialistic scholars or researchers, but what do…

God is both Personal and Impersonal

There are some sects (Smartism, Mayavadism (Advaitavadis) etc.) of people in the Sanatana Dharma who believe that the God is originally formless and quality-less only. But, the Logic and Vedic evidence say that the God is originally both, i.e. Formless and Not formless.

— श्रीकृष्ण के दिव्य ६४ गुण —

श्री चैतन्य महाप्रभु, सनातन गोस्वामी से कहते हे – “श्रीकृष्ण में अनंत गुण हे । उनमे ६४ गुण प्रमुख हे । भक्तोंके कर्ण संतुष्ट हो जाते हे इन गुणोंको एक के बाद एक सुनने से । वे गुण हे –
(१) अति मनोहर अङ्ग (२) सर्व सुलक्षणोंसे युक्त, (३) सुन्दर, (४) महातेज़स्वी, (५) बलवान (६) किशोर वयसयुक्त, (७) विविध अदभुत भाषापटु..

— भगवान् श्रीकृष्ण अद्वय हैं —

श्रीमद्भागवत १०.७४.४ तात्पर्य: श्रील प्रभुपाद अपनी पुस्तक “श्रीकृष्ण” में लिखते हैं ‘‘[राजा युधिष्ठिर ने कहा] आपकी वास्तविक स्थिति सदैव उच्चस्थ है, ठीक सूर्य के समान, जो अपने उदय और अस्त होते समय एक ही तापमान पर बना रहता है। यद्यपि उदय होते और अस्तमान सूर्य के बीच तापमान में हम अन्तर अनुभव करते हैं तथापि सूर्य का तापमान…